जयपुर की एक पारिवारिक अदालत ने एक व्यक्ति को उसकी पत्नी द्वारा मानसिक क्रूरता के आधार पर तलाक दे दिया है, जिसमें सोशल मीडिया पर उसका आचरण और विवाह के दौरान उसका व्यवहार शामिल है।

मामले में व्यक्ति के अधिवक्ता डी. एस. शेखावत ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि पति ने अदालत में एक याचिका दायर करके पत्नी के व्यवहार को मानसिक क्रूरता बताते हुए तलाक का अनुरोध किया था।

अदालत ने कहा कि अगर पत्नी किसी दूसरे पुरुष के साथ सोशल मीडिया पर इस तरह तस्वीरें साझा करती है जो सामान्य संबंधों से आगे बढ़कर हो, तो यह पति के प्रति मानसिक क्रूरता माना जा सकता है।

उन्होंने कहा, ‘‘अदालत ने गौर किया कि सोशल मीडिया पर साझा की गई सामग्री का सार्वजनिक प्रभाव होता है और व्यक्तियों को जिम्मेदारी से काम लेना चाहिए। अदालत ने इस बात पर भी विचार किया कि पत्नी ने अपशब्दों का प्रयोग किया और पति पर माता-पिता से अलग रहने का दबाव डाला। अदालत ने कहा कि ऐसा आचरण मानसिक उत्पीड़न के बराबर हो सकता है।’’

अदालत ने कहा कि वैवाहिक संबंधों में आपसी सम्मान और गरिमा आवश्यक है और बार-बार अपमानजनक व्यवहार को क्रूरता माना जा सकता है।

सत्रह अप्रैल को पारित आदेश में, अदालत ने कहा कि किसी अन्य पुरुष, चाहे वह रिश्तेदार हो या दोस्त, के साथ सामान्य सीमा से परे संबंध बनाए रखना और उन्हें इस तरह सोशल मीडिया पर प्रदर्शित करना न केवल वैवाहिक संबंधों के लिए हानिकारक है, बल्कि क्रूरता की श्रेणी में भी आता है।

अदालत ने कहा, ‘‘इसे वैवाहिक अनुचित व्यवहार और वैवाहिक संबंध का अपमान माना जा सकता है।’’

अदालत ने कहा, ‘‘पत्नी ने यह भी स्वीकार किया कि उसने स्वयं को अविवाहित बताकर पटवारी परीक्षा दी थी, जिससे यह संकेत मिलता है कि उसने नौकरी के आवेदन पत्रों में अपनी वैवाहिक स्थिति अविवाहित बताई थी और इस प्रकार उसने पति को स्वीकार नहीं किया, जैसा कि पति ने आरोप लगाया है।’’

दंपति का विवाह 2015 में हुआ था।

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